
October 15, 2014 · 1 min read
चौराहे का चिंतन
PoetryPhilosophy & Reflection
हर हाल में हसता हूँ
कसरत है मेरी
हर जाल में फसता हूँ
किस्मत है मेरी
हर डाल पर बसता हूँ
हसरत है मेरी
हर साल को तकता हूँ
हरकत है मेरी
© सुधीर रायकर
रात के पिछले पहर

October 15, 2014 · 1 min read
हर हाल में हसता हूँ
कसरत है मेरी
हर जाल में फसता हूँ
किस्मत है मेरी
हर डाल पर बसता हूँ
हसरत है मेरी
हर साल को तकता हूँ
हरकत है मेरी
© सुधीर रायकर
रात के पिछले पहर